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Welcome to Sadguru Dham • Experience Peace, Devotion & Divine Blessings

Sadguru Swami Krishnanand ji Maharaj​

Siddh Himalayan Yogi and Founder of Sadvipra Samaj Seva
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विशेष साधना

Devine Secret Science

भगवान कृष्ण के प्रति मीरा का समर्पण, अपने सच्चे शिष्य के प्रति एक गुरु या ऋषि का समर्पण और अपने शरीर की 7 ग्रंथियों से सात चक्रों को जागृत करना ही दिव्य गुप्त विज्ञान की परिभाषा है यह एक ऐसा विज्ञान है और साधना जो आपके पूरे जीवन को बदलने की क्षमता रखती है दिव्य गुप्त विज्ञान को सद्गुरु स्वामी कृणानंद जी महाराज ने अपने गुरु आत्मादास जी महाराज की अनुकंपा से प्राप्त किया और अब...

Swar Sadhna

स्वर योग साधना भारत की प्राचीनतम विधि है…जिसके प्रयोग से आप अपने घर-परिवार-समाज में प्रसन्नता पूर्वक रहते हुए सफलता प्राप्त कर सकते हैं…स्वर योग साधना केवल जीवंत स्वर-विद्य गुरु के सान्निध्य में रहकर ही फलित होती है…इस साधना में साधक अपने श्वास को माध्यम बनाकर, अपने दैहिक-दैविक-भौतिक तापों से मुक्त हो अध्यात्म के चरम पर पहुँचने की कला सीखता है…

Prem Sadhna

इस साधना में अपने सांसारिक मोह को त्यागकर खुद को एकाकी मानना होता है और फिर परमपूज्य गुरुदेव की कृपादृष्टि से आत्मिक योग का संचालन होता है जो हमें हमारे होने का बोध कराता है समस्त ब्रह्माण्ड में चराचर प्राणियों को देखने के सौभाग्य के साथ-साथ परमात्मा के दर्शन भी प्राप्त होते हैं लेकिन आत्मा से परमात्मा तक जाने में एकाग्रता का होना अत्यावश्यक होता है परमपूज्य गुरु जी...

Anhad Yog Sadhna

एक ऐसी ध्वनि होती है जो उत्पन्न नहीं की जाती, स्वतः गूंजती रहती है इसे स्थूल कानों से नहीं सुना जा सकता ये ध्वनि ब्रह्मांड में हर समय गूंजती रहती है इसके अनुभव के लिए हमारे ऋषियों ने अनेक अनुसंधान किए वे गुफाओं में बैठकर प्रयोग कर यह जानने की कोशिश करते रहे कि आखिर ये ध्वनि सुनने में कैसी लगती है क्या हम इसे बोल सकते हैं? अपने भीतर यह अनुसंधान किया तब पाया कि भीतर भी वही ध्वनि गूंज रही है...

Khechri Sadhna

खेचरी मुद्रा योगसाधना की एक मुद्रा है इस मुद्रा में चित्त एवं जिह्वा दोनों ही आकाश की ओर केंद्रित किए जाते हैं जिसके कारण इसका नाम ‘खेचरी’ पड़ा है इस मुद्रा की साधना के लिए प‌द्मासन में बैठकर दृष्टि को दोनों भौहों के बीच स्थिर करके फिर जिह्वा को उलटकर तालु से सटाते हुए पीछे रंध्र में डालने का प्रयास किया जाता है इस स्थिति में चित्त और जीभ दोनों ही ‘आकाश’ में स्थित रहते हैं, इसीलिये इसे ‘खेचरी’ मुद्रा कहते हैं...

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