Sadguru Swami Krishnanand ji Maharaj
सद्गुरु स्वामी कृष्णानन्द जी महाराज
संसार को अंधी आधुनिकता और अधर्म की चकाचौंध ने चारों ओर से घेर रखा है जिससे अधर्म की वृद्धि और धर्म की क्षति भी हो रही है, संसार को इस भीड़ मे भी परमात्मा का चिंतन हो उसके लिए किसी, ना किसी महान आत्मा को अवतार तो लेना ही होगा|
सद्विप्र वह विशेष प्रज्ञावान, उच्च चरित्रवान तथा श्रेष्ठ चिंतन वाला व्यक्ति होता है, जिसमें मानव जीवन के सभी आवश्यक गुणों का संतुलित समन्वय विद्यमान हो उसके व्यक्तित्व में शूद्रोचित सेवा-भाव, वैश्योचित प्रबंधन एवं संसाधनों का सदुपयोग, क्षत्रियोचित साहस, नेतृत्व एवं अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने की क्षमता तथा ब्राह्मणोचित ज्ञान, विवेक, आध्यात्मिक चेतना और नैतिक मूल्यों का समावेश होता है सद्विप्र अपने ज्ञान, कर्म और आदर्श आचरण से समाज का मार्गदर्शन करता है वह मानवता, सत्य, न्याय और करुणा को सर्वोच्च मानते हुए समाज में संतुलन, समरसता, नैतिकता और आध्यात्मिक उन्नति स्थापित करने के लिए सदैव समर्पित रहता है।
धर्म वह शक्ति है जो मनुष्य को मनुष्य बनाती है, और समाज को बेहतर बनाती है