Sadguru Swami Krishnanand ji Maharaj
सद्विप्र समाज सेवा
ब्राह्मणोचित सेवा
समाज में व्याप्त अज्ञान और अंधकार को दूर करने के लिए ज्ञान प्रदान करना|
क्षत्रियोचित सेवा
किसी कमजोर लाचार व अबला पर हो रहे अत्याचार की शक्ति से शमन करना|
वैश्योचित सेवा
पैसों की कमी से जूझ रहे दुखी लोगों को धन देकर सेवा करना|
शूद्रोचित सेवा
किसी भी रोगी, दुखी, अपाहिज अबला की शरीर से सेवा करना|
सद्विप्र समाज सेवा का अर्थ
सद्विप्र वह विशेष प्रज्ञावान, उच्च चरित्रवान तथा श्रेष्ठ चिंतन वाला व्यक्ति होता है, जिसमें मानव जीवन के सभी आवश्यक गुणों का संतुलित समन्वय विद्यमान हो उसके व्यक्तित्व में शूद्रोचित सेवा-भाव, वैश्योचित प्रबंधन एवं संसाधनों का सदुपयोग, क्षत्रियोचित साहस, नेतृत्व एवं अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने की क्षमता तथा ब्राह्मणोचित ज्ञान, विवेक, आध्यात्मिक चेतना और नैतिक मूल्यों का समावेश होता है सद्विप्र अपने ज्ञान, कर्म और आदर्श आचरण से समाज का मार्गदर्शन करता है वह मानवता, सत्य, न्याय और करुणा को सर्वोच्च मानते हुए समाज में संतुलन, समरसता, नैतिकता और आध्यात्मिक उन्नति स्थापित करने के लिए सदैव समर्पित रहता है।
सद्विप्र अपने ज्ञान, कर्म और आदर्श आचरण से समाज का मार्गदर्शन करता है वह मानवता, सत्य, न्याय और करुणा को सर्वोच्च मानते हुए समाज में संतुलन, समरसता, नैतिकता और आध्यात्मिक उन्नति स्थापित करने के लिए सदैव समर्पित रहता है।
स्वामीजी का उद्देश्य अत्यंत महत्वपूर्ण और मानवता के हित के लिए उत्कृष्ट है उनकी आत्ममोक्ष हेतु साधना की भावना मानव जीवन के उद्देश्य को समझने और संदेशों को अपनाने के लिए समर्पित है उनका ध्यान वेदांत और आध्यात्मिकता की ओर है, जो व्यक्ति को आत्मज्ञान और मुक्ति की ओर ले जाता है|
सद्गुरु के अनुसार वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना संपूर्ण मानवता के प्रति एक गहरी साधना है, जिसमें वे समस्त जीवों को एक ही परिवार का अंग मानते हैं इसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने ‘सद्विप्र समाज’ की स्थापना की – सद्विप्र समाज एक ऐसा संगठन जो समाज के हर वर्ग के लोगों के सामाजिक, आर्थिक और आध्यात्मिक उत्थान के लिए कार्यरत है सद्गुरु का संदेश स्पष्ट है: समस्त मानवता को प्रेम, समर्पण और सहयोग के सूत्र में बांधकर एक शांतिपूर्ण व समृद्ध समाज की रचना करनी चाहिए|
सद् विप्र समाज सेवा के सामाजिक एवं आध्यात्मिक कार्य
सद् विप्र समाज सेवा के केंद्र
भाई से भाई का रिश्ता जोड़ो “